बुधवार, सितंबर 29, 2010

चाहतों से गुज़र के देखा है

8 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति, वर्षा जी को बधाई।

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  2. संजय दानी जी, हार्दिक धन्यवाद!

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  3. चलो हम तो आ ही गए। सुंदर रचना।

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  4. kya kahun kya tha hawaon ka rukh
    pattiyon sa bikhar ke dekha hai....bahut sunder sher hai

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  5. makte k kathya tak nahi pahuch paya...
    Plz. muje samjaiye...

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