शुक्रवार, मई 20, 2011

आंखें मेरी सपने उनके


92 टिप्‍पणियां:

  1. "यादों की जलती तीली ने
    धीरे से सुलगाई रात ।"

    बहुत खूब ! क्या बात है ! वाह !
    उम्दा गजल ।

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  2. "यादों की जलती तीली ने
    धीरे से सुलगाई रात ।"

    बहुत बढ़िया वर्षाजी .....बेहतरीन ग़ज़ल

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  3. बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल है ,वर्षा जी.
    रात तनहा तो है पर खूबसूरत है.

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  4. "यादों की जलती तीली ने
    धीरे से सुलगाई रात ।"

    एक-एक शब्द साहित्य की धरोहर और संपूर्ण रूप से बात कह सकने में सक्षम, बेहतरीन ग़ज़ल के लिए बधाई

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  5. aadarniy Barsha ji namaskaar,

    bahut dinon baad ek sundar prastuti ke saath aagman , bahut achchha laga

    aabhar

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  6. बहुत सुन्दर गज़ल

    "यादों की जलती तीली ने
    धीरे से सुलगाई रात ।"

    वाह वाह

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  7. आंखें मेरी सपने उनके,
    अपनी हुई पराई रात ।
    ख़ूबसूरत शे'र ,बेहतरीन ग़ज़ल ,

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  8. रात फिर आएगी ,सपने फिर आयेंगें
    आप की इस गज़ल के शे'र फिर
    गुन-गुनाए जायेंगें |

    खुश रहिये !
    अशोक सलूजा !

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  9. आदरणीय वर्षा जी,
    बहुत सुन्दर गज़ल .... आभार

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  10. बीती नहीं बितायी जाए
    अब तो ये हरजाई रात..
    बहुत सुन्दर रचना..

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  11. डॉ.मीनाक्षी स्वामी जी,
    आपने मेरी गज़ल को पसन्द किया... हार्दिक धन्यवाद !
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  12. डॉ॰ मोनिका शर्मा जी,
    आपने मेरी गज़ल को पसन्द किया आभारी हूं।
    हार्दिक धन्यवाद! सम्वाद क़ायम रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  13. विशाल जी,
    मेरी गज़ल पर प्रतिक्रिया देने के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद।
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें....आपका सदा स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं
  14. कुश्वंश जी,
    जानकर प्रसन्नता हुई कि आपको मेरी गज़ल पसन्द आई....
    आपके आत्मीय विचारों ने मेरा उत्साह बढ़ाया है.... हार्दिक धन्यवाद एवं आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  15. संजय कुमार चौरसिया जी,
    यह जानकर सुखद अनुभूति हुई कि आपको मेरी ग़ज़ल पसन्द आई। आपको बहुत बहुत धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  16. दीपक सैनी जी,
    आपने मेरी गज़ल को पसन्द किया... हार्दिक धन्यवाद !
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें....

    उत्तर देंहटाएं
  17. डॉ. संजय दानी जी,
    आपने मेरी गज़ल को पसन्द किया......अत्यन्त आभारी हूं आपकी......विचारों से अवगत कराने के लिए.. हार्दिक धन्यवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  18. बहुत खूबसूरत गज़ल ..

    आंखें मेरी सपने उनके,
    अपनी हुई पराई रात ।

    बहुत खूब

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  19. यशवन्त माथुर जी,
    इसी तरह अपने अमूल्य विचारों से अवगत कराते रहें।
    मेरी गज़ल पर प्रतिक्रिया देने के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  20. निशान्त जी,SAJAN.AAWARA
    आपने मेरी ग़ज़ल को पसन्द किया..सुखद लगा ...
    आभारी हूं।

    उत्तर देंहटाएं
  21. अशोक सलूजा जी,
    आपके विचारों ने मेरा उत्साह बढ़ाया है.
    हार्दिक धन्यवाद एवं आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  22. संजय भास्कर जी,
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है!
    कृपया इसी तरह अपने अमूल्य विचारों से अवगत कराते रहें।

    उत्तर देंहटाएं
  23. आशुतोष जी,
    आपने मेरी गज़ल को पसन्द किया... हार्दिक धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  24. संगीता स्वरुप जी,
    मेरी गज़ल को आत्मीयता प्रदान करने के लिये आभार....
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है!
    कृपया इसी तरह अपने अमूल्य विचारों से अवगत कराती रहें।

    उत्तर देंहटाएं
  25. यादों की जलती तीली ने
    धीरे से सुलगाई रात ।"
    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति , बधाई

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  26. सुनील कुमार जी,
    आपने मेरी गज़ल को पसन्द किया आभारी हूं।
    हार्दिक धन्यवाद! सम्वाद क़ायम रखें।

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  27. हर शेर लाजवाब,मत्ले से मक्ते तक बेहतरीन ग़ज़ल है,वर्षा जी.

    उत्तर देंहटाएं
  28. कुंवर कुसुमेश जी,
    यह जानकर प्रसन्नता हुई कि मेरी गज़ल आपको पसन्द आई.... बहुत-बहुत आभार......

    उत्तर देंहटाएं
  29. कहतें हैं न सब्र का फल मीठा होता है -कबसे था आपकी ग़ज़ल का इंतज़ार -
    "वर्षा की मीठी ग़ज़लों से फिर से है हर्षाई रात ,''
    दिन बीता फिर आई रात ,कैसी ये दुखदाई रात ,
    यादों की जलती तीली ने ,धीरे से सुलगाई रात ।
    " वर्षा की ग़ज़लों में अकसर उनकी है परछाईं रात ।"
    "मिलकर उनसे करे ठ्होका ऐसी है अलसाई रात ।"
    ग़ज़ल के साथ छेड़खानी के लिए मुआफी चाहता हूँ ,आपकी ग़ज़लें कुछ न कुछ छेड़ देती हैं उस वीणा के तार जिसपे ज़मी है बरसों सेहै ,धूल धनकड़ .

    उत्तर देंहटाएं
  30. डॉ वर्षा सिंह जी नमस्कार -बहुत सुन्दर गजल आप के -सुन्दर ब्लॉग
    यादों की जलती तीली ने
    धीरे से सुलगाई रात
    होंठो पर अश आर चाँद के
    काजल में कजराई रात
    एक निवेदन है कठिन शब्द के अर्थ नीचे दे दिया करें जैसे "अश आर "-उर्दू लफ्ज सब कम समझ पाते होंगे -

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  31. कविताई का असल मजा तो इन छंदबद्ध पंक्तियों में है, शब्‍द शब्‍द भाव भरे...

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  32. Varsha ji,ghazab ki ghazale likh rahi hai aap,kamal hai sahab,aap me gazab hi jalal hai sahab,/tareef kam hai gun jyada hain .pahli baar aya aur aapka mureed ho gaya ,kis ki alag se tareef karoo,sabhi kabile tareef hai kuch jyada kuch kam.
    hardik abhar ,dhanyavaad in ghazalo ke liye/
    sader,
    dr.bhoopendra
    rewa
    mp

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  33. वीरू भाई जी,
    अनुगृहीत हूं आपकी इस आत्मीय टिप्पणी के लिए...
    अपने विचारों से अवगत कराने के लिए हार्दिक धन्यवाद एवं आभार।
    इसी तरह आत्मीयता बनाएं रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  34. भ्रमर जी,
    यह जानकर प्रसन्नता हुई कि मेरी गज़ल आपको पसन्द आई....बहुत-बहुत आभार......
    आपको सुझावों का स्वागत है.

    उत्तर देंहटाएं
  35. संजीव जी,
    मेरी गज़ल आपको पसन्द आई यह जान कर सुखद अनुभव हुआ.
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें....आपका सदा स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं
  36. डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह जी,
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है!
    कृपया इसी तरह अपने अमूल्य विचारों से अवगत कराते रहें।
    मेरी गज़ल पर प्रतिक्रिया देने के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  37. यादों की जलती तीली ने
    धीरे से सुलगाई रात|
    सुलग गयी जब रात सुहानी
    काटे ना कट पाई रात|

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  38. यादों की जलती तीली ने
    धीरे से सुलगाई रात.....


    -क्या बात है, वाह!! बहुत उम्दा गज़ल!!!

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  39. बहुत ही सुन्दर ,उम्दा ग़ज़ल.छोटी -छोटी लाइनें,सीधे -सरल शब्द,गहरे-गहरे भाव.
    रात के तीन रूप और...
    चाँद -सितारे फरियादी हैं
    करती है सुनवाई रात.
    चाँद कटोरा लिए हाथ में
    भीख मांगने आई रात.
    जाने कितने ख्वाब मिटा कर
    हौले से मुस्काई रात.

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  40. आदरणीया वर्षा जी
    सादर प्रणाम !

    कमाल लिखती हैं आप …

    दिन बीता फिर आई रात !
    कैसी ये दुखदाई रात !

    आंखें मेरी सपने उनके ,
    अपनी हुई पराई रात !


    आपकी ग़ज़लें ज़रा भी बोझिल नहीं होतीं…
    बहुत बड़ी ख़ासियत है यह … मुबारकबाद !

    क्षमाप्रार्थी हूं , विलंब से आया हूं , कमेंट यहीं किया है , लेकिन तमाम न पढ़ी हुई ग़ज़लें पढ़ कर भरपूर आनन्द के साथ लौट रहा हूं ।
    हार्दिक आभार और शुभकामनाएं !

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  41. हेम पांङेय जी,
    अनुगृहीत हूं आपकी आत्मीय टिप्पणी के लिए...
    वाह क्या शेर कहा है आपने भी मेरे शेर के साथ....बहुत खूब !

    उत्तर देंहटाएं
  42. समीर लाल जी,
    अत्यन्त आभारी हूं आपकी......
    विचारों से अवगत कराने के लिए.. हार्दिक धन्यवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  43. अरुण कुमार निगम जी,
    बहुत खूब कहा है आपने ...।
    मेरी गजल में चंद शेर जोड़ कर आपने मेरी गजल को जो सम्मान दिया है उसके लिए हार्दिक धन्यवाद एवं आभार.
    इसी तरह आत्मीयता बनाएं रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  44. राजेन्द्र स्वर्णकार जी,
    देर से सही, आपका आना सुखद लगा ...... हार्दिक धन्यवाद !
    कृपया इसी तरह सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  45. सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ लाजवाब रचना लिखा है आपने! दिल को छू गयी हर एक पंक्तियाँ! उम्दा प्रस्तुती!

    उत्तर देंहटाएं
  46. वर्षाजी!हम आपकी गजलों गीतों का री -मिक्स बनाते रहें हैं पहले -',"धूप साया नदी हवा औरत का ,इस धरा पर नेमते खुदा औरत "हामाराब्लॉग देखिएगा पीछे जाइयेगा थोड़ा सा .मिलेगा यह री -मिक्स आपके आदरणीय उल्लेख के साथ और अब बारी इस गज़ल की है -
    सावन बदरा और घटाएं ,उसकी है परछाईं रात ,
    बरखा की बौछारें छप छप उसमें खूब नहाई रात .गुस्ताखी मुआफ .

    उत्तर देंहटाएं
  47. वर्षाजी!हम आपकी गजलों गीतों का री -मिक्स बनाते रहें हैं पहले -',"धूप साया नदी हवा औरत का ,इस धरा पर नेमते खुदा औरत "हामाराब्लॉग देखिएगा पीछे जाइयेगा थोड़ा सा .मिलेगा यह री -मिक्स आपके आदरणीय उल्लेख के साथ और अब बारी इस गज़ल की है -
    सावन बदरा और घटाएं ,उसकी है परछाईं रात ,
    बरखा की बौछारें छप छप उसमें खूब नहाई रात .
    चन्दा की चंदनिया में फिर उजली धुलीधुलाई रात ,
    होठों पर अशारे मोहब्बत ,फिर से है शरमाई रात ।
    क्या करें हम से रहा नहीं जाता ,भाव गंगा में छोड़ आप चली जातीं हैं .

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  48. बहुत अच्छा लिखती हैं आप । मजा आ गया पढ कर । लिखजें रहें हमारे लिए ।

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  49. वर्षा जी,

    क्या बढ़िया लिखा है सच ही तो है....

    "यादों की जलती तीली ने
    धीरे से सुलगाई रात!
    आंखें मेरी सपने उनके,
    अपनी हुई पराई रात ।"

    आप कभी मेरे ब्लॉग पर भी जरूर आयें..बहुत बहुत आभार.

    आशु
    http://www.dayinsiliconvalley.blogspot.com/
    http://sukhsaagar.blogspot.com/
    http://whatsupsiliconvalley.blogspot.com/

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  50. बहुत खूब ... लाजवाब ग़ज़ल है ... हर शेर पर वाह वाह निकलती है ...

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  51. क्या बात है
    दिन बीता और आई रात, कैसी ये दुखदायी रात। बहुत सुंदर

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  52. वह वह वह मज्जा हे आ गिया बहुत हे उम्दा शब्द है !मेरे ब्लॉग पर जरुर आए ! आपका दिन शुब हो !
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    Shayari Dil Se

    उत्तर देंहटाएं
  53. रश्मि प्रभा जी,
    आपने मेरी गज़ल को पसन्द किया आभारी हूं।
    हार्दिक धन्यवाद! सम्वाद क़ायम रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  54. उर्मि चक्रवर्ती जी,
    इस उत्साहवर्द्धन के लिए अत्यन्त आभारी हूं। आपको बहुत-बहुत धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  55. veerubhai ji,
    Thanks for your comments.
    Hope you will be give me your valuable response on my future posts.
    Always welcome your comments on my blogs.

    उत्तर देंहटाएं
  56. वेदप्रकाश जी,
    आपका स्वागत है।
    मैं आपको धन्यवाद भर कहूं तो कम होगा, आपके अपनत्व ने मुझे भावविभोर कर दिया है।
    आभार...

    उत्तर देंहटाएं
  57. आशु जी,
    मेरी गज़ल आपको पसन्द आई यह जान कर सुखद अनुभव हुआ.
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें....आपका सदा स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं
  58. दिगम्बर नासवा जी,
    आप जैसे शायर के विचार मेरे लिए महत्वपूर्ण हैं....अपने विचारों से अवगत कराने के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  59. महेन्द्र श्रीवास्तव जी,
    अपने विचारों से अवगत कराने के लिए हार्दिक धन्यवाद एवं आभार।
    इसी तरह आत्मीयता बनाएं रखें।

    ,

    उत्तर देंहटाएं
  60. Manpreet Kaur Ji,
    It's a pleasure to have you on my blog. regards,

    उत्तर देंहटाएं
  61. छोटी बहर में आपको महारथ हासिल होती जा रही है. बहुत ही अच्छे शेर कहे हैं आपने. एक कामयाब ग़ज़ल....बधाई!
    ---देवेंद्र गौतम

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  62. जो दिल ने कहा ,लिखा वहाँ
    पढिये, आप के लिये;मैंने यहाँ:-
    http://ashokakela.blogspot.com/2011/05/blog-post_1808.html

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  63. यादों की जलती तीली ने
    धीरे से सुलगाई रात ।
    kya likha hai gajab bahut hi sunder
    badhai
    rachana

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  64. कैसे,किन शब्दों में कह दी उसने अपने दिल की बात....
    खिलखिलाकर हंसने लगी काली अंधियारी पगली रात !!
    चन्दा अचकचाकर जागा और लेने लागा जब अंगडाई
    शरमाकर तब उठ बैठी और जगमगाने लग गयी रात !!
    तडके ही इक सपना देखा कि जम्हाई लेती थी रात
    धरती और आसमां के बीच पुल बन जाती थी रात !!
    अब तो मैं खुद भी बातें करने अंगडाई लेकर उठ बैठा हूँ
    ना जाने अब कब क्या बोलेगी अनजानी-दीवानी रात !!

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  65. होंटों पर अशआर चाँद के
    काजल में कजराई रात

    ये शेर ग़ज़ल की शान में सचमुच
    चार चाँद लगा रहा है ...
    पूरी ग़ज़ल ही
    जगमग तारों का आकाश बन पडी है !!
    मुबारकबाद .

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  66. अरुण कुमार निगम जी,
    बहुत-बहुत धन्यवाद।

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  67. देवेंद्र गौतम जी,
    अत्यन्त आभारी हूं आपकी......
    विचारों से अवगत कराने के लिए.. हार्दिक धन्यवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  68. डॉ॰ दिव्या श्रीवास्तव जी,
    इस उत्साहवर्द्धन के लिए अत्यन्त आभारी हूं। आपको बहुत-बहुत धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  69. अशोक जी,
    हार्दिक धन्यवाद एवं आभार.
    इसी तरह आत्मीयता बनाएं रखें।

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  70. रचना जी,
    अनुगृहीत हूं आपकी इस आत्मीय टिप्पणी के लिए...
    अपने विचारों से अवगत कराने के लिए हार्दिक धन्यवाद एवं आभार।

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  71. विवेक जैन जी,
    विचारों से अवगत कराने के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  72. राजीव थेपड़ा जी,
    आपने बहुत सुन्दर शब्दों में अपनी बात कह कर मेरी गजल को जो सम्मान दिया है उसके लिए हार्दिक धन्यवाद एवं आभार.
    इसी तरह आत्मीयता बनाएं रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  73. दानिश जी,
    मेरी गज़ल आपको पसन्द आई यह जान कर सुखद अनुभव हुआ.
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें....आपका सदा स्वागत है।

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  74. यादों की जलती तीली ने,
    धीरे से सुलगाई रात !
    वाह वर्षा जी, क्या शेर है !
    जितना सुन्दर विम्ब उतना ही सुन्दर भाव !
    आभार !

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  75. "यादों की तीली" और "रात का सुलगना" बहु खूब लगा ये अंदाज़े बयाँ!
    शानदार ग़ज़ल!

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  76. बहुत सुन्दर शब्दों में सजी ये खुबसूरत रात |
    सुन्दर ग़ज़ल |

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  77. वर्षा जी नमस्कार. क्या लाजवाब ग़ज़ल है. वाह.
    मैंने शायद आपको पहले भी पढ़ा है. मुंबई जनसत्ता के सबरंग में.कोई दो दशक पहले.सही है न?

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  78. आदरणीया डा० वर्षा - टिप्पणियों की इस भीड़ में क्या टिपण्णी दूँ? लेकिन ग़ज़ल पढ़ के खुद को रोक पाना कठिन है. एक शब्द में कहूँ तो आपके इस ग़ज़ल को पढ़कर काफी आत्मिक सुख मिला. आप बहुत अच्छा लिखतीं हैं. कई बार पढ़ने के बाद भी प्यास बनी हुई है. मैंने अपने कई मित्रों से भी आपके बारे में चर्चा की है. सचमुच आप की लेखनी प्रशंसनीय हैं कम से कम मैं बहुत प्रभावित हुआ. संपर्क बनाए रखने की कामना के साथ-
    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  79. ज्ञानचंद मर्मज्ञ जी,
    अत्यन्त आभारी हूं आपकी......
    विचारों से अवगत कराने के लिए.. हार्दिक धन्यवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  80. 'साहिल' जी,
    इस उत्साहवर्द्धन के लिए अत्यन्त आभारी हूं। आपको बहुत-बहुत धन्यवाद !

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  81. मीनाक्षी पंत जी,
    हार्दिक धन्यवाद एवं आभार.
    इसी तरह आत्मीयता बनाएं रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  82. संतोष पाण्डेय जी,
    जी हां, मुंबई जनसत्ता के सबरंग में मेरी गजलों को प्रकाशित होने का अवसर मिलता रहा है.....
    स्मरण करने और विचारों से अवगत कराने के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद।
    इसी तरह आत्मीयता बनाएं रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  83. श्यामल सुमन जी,
    आपकी टिप्पणी भी मेरे लिये बहुमूल्य हैं....इस आत्मीय टिप्पणी के लिए अत्यंत आभार....

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  84. अमरेन्द्र अमर जी,
    विचारों से अवगत कराने के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद।

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  85. वाह! क्या भाव हैं। क्या अशयार हैं। हर किसी को बिलकुल अपने लगते हैं। जैसे कुछ शेर जोड देने का दिल कर रहा है-
    हमदम की यादांे का झोंका
    आंचल में भर लाई रात।
    बाहों में सर रख कर सोई
    सारी रात जगाई रात।

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