बुधवार, अगस्त 01, 2012

भीगना है..........


12 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर काव्य रचना , सामयिक भी

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  2. मेघ में भीग कर इसका भी आनंद लिया जाये ...

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  3. बहुत सुन्दर रचना....
    बहुत कुछ कहतीं हैं ये चंद पंक्तियाँ.....

    सादर
    अनु

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  4. आभा द स्प्लेंडर में प्रकाशित ८ लाइन आपको समर्पित जिन्हें पहले आपके लिए कमेन्ट के रूप में
    मुकद्दर की लकीरों को बदलना सीख ले राही
    देखना खुद ही एक दिन उगेंगे पंख सोने के ..

    है काम कायर का झुकाना सिर उठाकर फिर
    इबादत में उठाया हाथ आसमां थाम लेता है ..

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  5. बारिश में भीगते हुए काश इसे पढ़ना सम्भव होता तो मज़ा ही और होता.

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  6. कई भावो को समेटे
    बेहतरीन रचना:-)

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  7. वाह ! बहुत सुन्दर पंक्तियाँ .
    देश की आम जनता ऐसे ही आनंद लेती है .

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  8. बहुत खूब ... सच है छाता नहीं तो भीगना तो है ... पर उसको जिया जाय तो क्या बात .... लाजवाब शेर ...

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  9. चित्र को सुंदर अभिव्यक्ति मिली।

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