मंगलवार, अगस्त 28, 2012

जिंदगी......


7 टिप्‍पणियां:

  1. परछाइयों से ज़िन्दगी दबती रही कहीं ?
    परछाइयों से ही ज़िन्दगी ज़िन्दगी रही

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  2. स्वयं से पहले परछाईयों को पहचानना हो।

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  3. हर परछाई में जिंदगी का राज़ छिपा हैं
    यूँ तो उलटी दिशा से आती हुई रोशनी
    बना देती हैं एक नई सी परछाई
    जो साथ चलती तब तक ,
    जब तक वो खुद में
    ना छिप जाए || अंजु (अनु)

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  4. दूर रहने से ही सच से सामना हो पाता है ... उम्दा शेर ..

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