सोमवार, मई 01, 2017

चुभ रही ख़ामोशियां, कुछ तो कहो

प्रिय मित्रो,
              मेरे ग़ज़ल संग्रह "वक़्त पढ़ रहा है"  से एक ग़ज़ल आप सब के लिए....
चुभ रही ख़ामोशियाँ कुछ तो कहो
उठ रही हैं, उंगलियां कुछ तो कहो
#वक़्त_पढ़_रहा_है

बुधवार, मार्च 08, 2017

Happy Women's Day

डॉ. वर्षा सिंह की ग़ज़ल -

सागर की लहर, झील का पानी हैं औरतें।
बहती  हुई  नदी  की   रवानी हैं औरतें।

दुनिया की हर मिसाल में शामिल हैं आज वे
‘लैला’ की, ‘हीर’ की जो कहानी  हैं औरतें।

उनका  लिखित स्वरूप  महाकाव्य की तरह
वेदों की ऋचाओं-सी  ज़ुबानी  हैं  औरतें।

मिलती हैं  जब कभी  वे  सहेली के रूप में
यादों  की  वादियों-सी  सुहानी  हैं औरतें।

‘मीरा’  बनी कभी,  तो ‘कमाली’  बनी कभी
‘वर्षा’  कहा  सभी  ने -‘दीवानी हैं औरतें’।
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