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सोमवार, दिसंबर 21, 2020

शायरी मेरी सहेली की तरह | ग़ज़ल | डॉ. वर्षा सिंह | संग्रह - सच तो ये है

Dr. Varsha Singh

शायरी मेरी सहेली की तरह


           -  डॉ. वर्षा सिंह


शायरी मेरी सहेली की तरह

मेंहदी वाली हथेली की तरह


हर्फ़ की परतों में खुलती जा रही

ज़िन्दगी जो थी पहेली की तरह


मेरे सिरहाने में तकिया ख़्वाब का

नींद आती है नवेली की तरह


आग की सतरें पिघल कर सांस में

फिर महकती हैं चमेली की तरह


ये मेरा दीवान "वर्षा"- धूप का

रोशनी की इक हवेली की तरह


          ------------


(मेरे ग़ज़ल संग्रह "सच तो ये है" से)




22 टिप्‍पणियां:

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  2. बहुत ख़ूब वर्षा जी ! बहुत ही प्यारी ग़ज़ल है यह आपकी ।

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    1. हार्दिक आभार आदरणीय जितेन्द्र माथुर जी 🙏

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (23-12-2020) को   "शीतल-शीतल भोर है, शीतल ही है शाम"  (चर्चा अंक-3924)   पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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    1. आदरणीय शास्त्री जी,
      हार्दिक आभार 🙏💐🙏

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  4. बहुत लाजवाब शेर ...
    कमाल की गज़ल है ...

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    1. बहुत शुक्रिया तहेदिल से... आपने प्रशंसा की... लेखन सार्थक हुआ।
      🙏

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  5. हार्दिक आभार पम्मी जी 🙏

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  6. शायरी मेरी सहेली की तरह

    मेंहदी वाली हथेली की तरह...वाह!बहुत सुंदर दी।

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    1. हार्दिक धन्यवाद प्रिय अनीता जी 🙏🌷🙏

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  7. हर शेर लाजवाब बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल मन मोह गई।
    बेहतरीन।

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    1. हार्दिक धन्यवाद कुसुम कोठरी जी 🙏🌺🙏

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  8. कोमल भावों से युक्त

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  9. बेहद प्यारी गजल,सच शायरी और लेखन कार्य अपनी सच्ची सहेली ही तो है वर्षा जी,सादर नमन

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    1. दिल से धन्यवाद प्रिय कामिनी जी 🙏🌺🙏

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  10. बहुत बहुत धन्यवाद सुमन जी 🙏

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  11. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। आपको बधाई और शुभकामनाएं।

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    1. हार्दिक धन्यवाद वीरेंद्र सिंह जी 🙏

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  12. हर्फ़ की परतों में खुलती जा रही
    ज़िन्दगी जो थी पहेली की तरह

    बहुत सुंदर ग़ज़ल....

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद विकास नैनवाल जी 🙏

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    2. मेरे ब्लॉग पर सदैव आपका स्वागत है।

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