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Dr. Varsha Singh |
*ग़ज़ल*
*ठीक नहीं*
- डॉ. वर्षा सिंह
हर मुद्दे पर झंझट - झगड़ा ठीक नहीं
बिना बात का लफड़ा-दफड़ा ठीक नहीं
मज़बूरी में फटा पहनना चलता है
फैशन में लटकाना चिथड़ा ठीक नहीं
फूल खिले हों, तरह-तरह की ख़ुशबू हो
अगर बाग़ है तो फिर उजड़ा ठीक नहीं
खाली-पीली आपस में तक़रार ग़लत
हरदम जात-धरम का पचड़ा ठीक नहीं
"वर्षा" अपना है जग सारा, सब अपने
यूं ही रहना उखड़ा-उखड़ा ठीक नहीं
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प्रिय मित्रों,
मेरी ग़ज़ल को web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 20 दिसम्बर 2019 में स्थान मिला है।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏
मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (24-12-2019) को "अब नहीं चलेंगी कुटिल चाल" (चर्चा अंक-3559) पर भी होगी।
जवाब देंहटाएं--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
बहुत बहुत हार्दिक आभार 🙏
जवाब देंहटाएंबेहतरीन सृजन आदरणीया
जवाब देंहटाएंसादर