![]() |
| Dr. Varsha Singh |
उसकी यादें
-डॉ. वर्षा सिंह
शाम को किसने पत्ता थोड़ा
दुख से मेरा नाता जोड़ा
तेज़ हवा के इक झोंके ने
बीच सफ़र में लाकर छोड़ा
उसकी यादें पहने बैठीं
रेशम का सतरंगी जोड़ा
काला सूरज, तपता चंदा
दरिया का रुख़ किसने मोड़ा?
रातों जगती आंखें जलतीं
नींद न आई, अटका रोड़ा
बादल सुलगा "वर्षा" दहकी
बूंद भी बरसी थोड़ा-थोड़ा
--------------
(मेरे ग़ज़ल संग्रह "सच तो ये है" से)
