ग़ज़लयात्रा GHAZALYATRA
ग़ज़ल पत्रिका By Dr Varsha Singh
Pages
Home
मित्रों की क़लम से
समीक्षा
रपट
माटी की गंध
मेरा परिचय My CV
फोटो गैलरी
शनिवार, जुलाई 23, 2016
My Shayari
भोर हो कर भी ज़िन्दगी ठहरी
गर ख़ुमारी न रात की उतरी
ज़िद पे गर आ गये विफल होगी
लाख़ दुश्मन की चाल हो गहरी
आइये मिल के हम करें कोशिश
हो न 'वर्षा' कहीं कभी ज़हरी
- डॉ वर्षा सिंह
रविवार, जून 05, 2016
My Poetry On World Environment Day.... विश्व पर्यावरण दिवस पर...
सोमवार, अप्रैल 18, 2016
My Poetry
सोमवार, मार्च 07, 2016
Happy Women's Day
गुरुवार, दिसंबर 31, 2015
Happy New Year 2016
सोमवार, दिसंबर 28, 2015
प्यार को तुम प्यार ही पढ़ना ....
Varsha Singh ... Pyar ko tum pyar hi parhana
शुक्रवार, दिसंबर 11, 2015
My poetry
नई पोस्ट
पुराने पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
संदेश (Atom)