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Dr.Varsha Singh |
ग़ज़ल
उजाला लाइए
बंद कमरों में उजाला लाइए
भूख के बदले निवाला लाइए
धूप की कोई ख़बर मिलती नहीं
ढ़़ूंढ़ कर ताजा़ रिसाला लाइए
ज़िन्दगी का स्वाद कड़वाहट भरा
हो सके तो कुछ निराला लाइए
आपकी बातें निराशा से भरीं
आस्था का भी हवाला लाइए
बूंद ‘वर्षा ’ की नदी बन जाएगी
हौसला आषाढ़ वाला लाइए
भूख के बदले निवाला लाइए
धूप की कोई ख़बर मिलती नहीं
ढ़़ूंढ़ कर ताजा़ रिसाला लाइए
ज़िन्दगी का स्वाद कड़वाहट भरा
हो सके तो कुछ निराला लाइए
आपकी बातें निराशा से भरीं
आस्था का भी हवाला लाइए
बूंद ‘वर्षा ’ की नदी बन जाएगी
हौसला आषाढ़ वाला लाइए
- डॉ. वर्षा सिंह
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http://yuvapravartak.com/?p=8745 |
आपकी लिखी रचना "मुखरित मौन में" शनिवार 26 जनवरी 2019 को साझा की गई है......... https://mannkepaankhi.blogspot.com/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंहार्दिक आभार प्रिय यशोदा जी 🙏
हटाएंइस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर आशावादी कविता वर्षा जी ! लेकिन साहिर ने आम आदमी के लिए कहा है -
जवाब देंहटाएंहम गमज़दां हैं,
लाएं कहाँ से ख़ुशी के गीत.
देंगे वही जो पाएंगे,
इस ज़िन्दगी से हम.
तंग आ चुके हैं, कशमक़शे, ज़िन्दगी से हम !
लाजवाब गजल....
जवाब देंहटाएंवाह!!!
बंद कमरों में उजाला लाइए
जवाब देंहटाएंभूख के बदले निवाला लाइए
....बहुत खूब.....लाजवाब रचना.. आदरणीया