कोई छू कर गया लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
कोई छू कर गया लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, जनवरी 06, 2021

कोई छू कर गया | ग़ज़ल | डॉ. वर्षा सिंह | संग्रह - सच तो ये है

Dr. Varsha Singh

कोई छू कर गया

            - डॉ. वर्षा सिंह


काश, खिड़की तो इक ज़रा खुलती

फिर से उम्मीद की हवा चलती


इस क़दर है उदास बाग़ीचा 

फूल महका न अब कली खिलती 


कोई छू कर गया ख़यालों में 

चूनरी देर तक रही ढलती 


आईने में वही नज़र आता

मेरी सूरत मुझे नहीं मिलती


मन कभी क़ैद में नहीं रहता 

लोग कह दें भले इसे ग़लती 


रात भर जागती रही "वर्षा" 

दूर कंदील इक रही जलती


------------


(मेरे ग़ज़ल संग्रह "सच तो ये है" से)