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| Dr. Varsha Singh |
क्या ख़ूब दोस्ती है !
-डॉ. वर्षा सिंह
वो है तो ज़िन्दगी है, नहीं है तो कुछ नहीं
यूं बात ज़रा सी है, नहीं है तो कुछ नहीं
यादों के जल रहे हैं ढेरों चिराग यूं तो
कहने को रोशनी है, नहीं है तो कुछ नहीं
मिट्टी के ख़्वाब मिट्टी में मिल गए तो क्या
इक फांस-सी लगी है, नहीं है तो कुछ नहीं
एक दोस्त दुश्मनों में शामिल है इन दिनों
क्या ख़ूब दोस्ती है, नहीं है तो कुछ नहीं
हसरत की झाड़ियों से बाहर ना आ सकी
दुबकी हुई ख़ुशी है, नहीं है तो कुछ नहीं
"वर्षा" समझ न पाई आबे- सुखन का राज़
ये कैसी तिश्नगी है, नहीं है तो कुछ नहीं
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(मेरे ग़ज़ल संग्रह "सच तो ये है" से)
