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Dr. Varsha Singh |
क्या ख़ूब दोस्ती है !
-डॉ. वर्षा सिंह
वो है तो ज़िन्दगी है, नहीं है तो कुछ नहीं
यूं बात ज़रा सी है, नहीं है तो कुछ नहीं
यादों के जल रहे हैं ढेरों चिराग यूं तो
कहने को रोशनी है, नहीं है तो कुछ नहीं
मिट्टी के ख़्वाब मिट्टी में मिल गए तो क्या
इक फांस-सी लगी है, नहीं है तो कुछ नहीं
एक दोस्त दुश्मनों में शामिल है इन दिनों
क्या ख़ूब दोस्ती है, नहीं है तो कुछ नहीं
हसरत की झाड़ियों से बाहर ना आ सकी
दुबकी हुई ख़ुशी है, नहीं है तो कुछ नहीं
"वर्षा" समझ न पाई आबे- सुखन का राज़
ये कैसी तिश्नगी है, नहीं है तो कुछ नहीं
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(मेरे ग़ज़ल संग्रह "सच तो ये है" से)
बहुत धन्यवाद माथुर जी 🙏
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" ( 2001...यात्रा के अनेक पड़ाव होते हैं...) पर गुरुवार 07 जनवरी 2021 को साझा की गयी है.... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंहार्दिक आभार आदरणीय रवीन्द्र सिंह यादव जी 🙏🌺🙏
हटाएंबहुत सुन्दर
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय जोशी जी 🙏🌺🙏
हटाएंग़ज़ल कहने में माहिर हैं आप वर्षा जी । एक और ख़ूबसूरत ग़ज़ल निकली है यह आपकी क़लम से ।
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद माथुर जी 🙏🌹🙏
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जवाब देंहटाएंएक दोस्त दुश्मनों में शामिल है इन दिनों
क्या ख़ूब दोस्ती है, नहीं है तो कुछ नहीं..क्या खूब कहा है..खूबसूरत ग़ज़ल..
बहुत शुक्रिया प्रिय जिज्ञासा जी 🌹
हटाएंवाहहहहह बहुत सुंदर ग़ज़ल। हसरत की झाड़ियों से बाहर न आ सकी ....नहीं है तो कुछ नहीं । बधाई हो सूंदर ग़ज़ल संग्रह के लिए। 💐💐
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद मिश्र जी 🙏💐🙏
हटाएंशानदार असरार , बहुत सुंदर उम्दा बेहतरीन।
जवाब देंहटाएंशुक्रिया तहेदिल से आदरणीय कुसुम कोठारी जी 🙏
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