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बुधवार, जून 12, 2019

छोटी बच्चियों से दुष्कर्म की घटनाओं पर मेरी अश्रुपूरित अभिव्यक्ति ... क्या हुआ है आज मेरे देश को - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

      देश भर में अनेक स्थानों पर लगातार घट रही छोटी बच्चियों से दुष्कर्म की घटनाओं पर मेरी अश्रुपूरित अभिव्यक्ति के रूप में सृजित मेरी इस ग़ज़ल को web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 12 जून 2019 में स्थान मिला है। 
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏

ग़ज़ल

      क्या हुआ है आज मेरे देश को !

              -डॉ. वर्षा सिंह

शर्म से इंसान की आंखें झुकीं, क्या हुआ है आज मेरे देश को!
क्या सभी संवेदनाएं मर चुकीं ! क्या हुआ है आज मेरे देश को!

हो रहा गुलशन कलंकित अब यहां, नोच कर कलियों को फेंका जा रहा,
आसमां काला, हुई काली ज़मीं, क्या हुआ है आज मेरे देश को।

रोज़ दुष्कर्मों की ख़बरें मिल रहीं, संस्कारों का गला घुंटने लगा,
आबरू महफूज़ दिखती है नहीं, क्या हुआ है आज मेरे देश को।

हो रहे हैं लोग क्यों वहशी यहां, सोचने की शक्ति मानो शून्य है,
किस तरह घटनाएं ये होने लगीं, क्या हुआ है आज मेरे देश को।

त्रासदी पहुंची चरम पर इस क़दर, हृदय पर दुख की शिलाएं टूटतीं,
ख़ून के आंसू दिशाएं रो रहीं, क्या हुआ है आज मेरे देश को।

है विह्वल "वर्षा", दुखी बादल हुए, लोग कुछ कैसे अरे, पागल हुए !
बच्चियां भी अब सुरक्षित हैं नहीं, क्या हुआ है आज मेरे देश को।

मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...



Ghazal Yatra - Dr. Varsha Singh