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मंगलवार, दिसंबर 24, 2019

"ग़ज़ल जब बात करती है"- डॉ. वर्षा सिंह

"ग़ज़ल जब बात करती है"- डॉ. वर्षा सिंह

          शिवना प्रकाशन की फेसबुक वाल पर यह सूचना है- "नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में शिवना प्रकाशन के स्टॉल पर वरिष्ठ कवयित्री डॉ. वर्षा सिंह का नया ग़ज़ल संग्रह "ग़ज़ल जब बात करती है" उपलब्ध रहेगा। "
         मित्रों, दरअसल.. मेरा पांचवां ग़ज़ल संग्रह "दिल बंजारा" वर्ष 2012 में प्रकाशित हुआ था... तब के बाद मित्र अक्सर पूछते- आपका अगला संग्रह कब आ रहा है ? तमाम तरह की व्यस्तताओं के चलते मुस्कुरा कर टाल जाती थी मैं... लेकिन शिवना प्रकाशन को बहुत धन्यवाद दिल से... जिसकी बदौलत अब मेरे पास जवाब है - लीजिए यह रहा मेरा ताज़ा छठवां ग़ज़ल संग्रह ....

"ग़ज़ल जब बात करती है"- डॉ. वर्षा सिंह

       जी हां, मेरी इस ग़ज़लयात्रा में मुझे कभी धूप मिली तो कभी छांव। इस दफ़ा छांव की शीतलता का सुखद अहसास कराया है शिवना प्रकाशन ने। इस प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान की प्रकाशन की दुनिया में अपनी अलग ही पहचान है।

शिवना प्रकाशन की नई पुस्तकें 

           साहित्यमनीषी, कथाकार, उपन्यासकार, गज़लकार, व्यंग्यकार, सम्पादक ... या एक शब्द में यूं कहूं कि बहुप्रतिभाशाली भाई पंकज सुबीर और उनके बेहद जागरूक सहयोगी ग़ज़लकार अधिवक्ता शहरयार अमजद ख़ान सहित शिवना प्रकाशन टीम की मैं तहेदिल से शुक्रगुज़ार हूं जिन्होंने मेरी ग़ज़लों को संग्रह का रूप दिया।
             .... और आप सभी ब्लॉगर मित्रों के प्रति भी आभार जिन्होंने समय-समय पर अपनी टिप्पणियों के माध्यम से मुझे प्रोत्साहित किया।

रविवार, अक्टूबर 14, 2018

पंकज सुबीर की शायरी

Dr. Varsha Singh

यूं तो पंकज सुबीर कथा साहित्य के क्षेत्र में एक विशेष स्थान रखते हैं। ‘अकाल में सारस’ जैसी कथाकृति कथा साहित्य में एक मिसाल है। कहानी संग्रह ’महुआ घटवारिन और अन्‍य क‍हानियां’ के लिये पंकज सुबीर को वर्ष 2012 का ’कथा यूके अंतर्राष्‍ट्रीय इन्‍दू शर्मा कथा सम्‍मान’ से सम्मानित किया जा चुका है। किन्तु पंकज की शायरी भी उतनी ही उम्दा है।
गद्य और पद्य लेखन में बराबरी से दखल रखने वाले,‘अभी तुम इश्क में हो’ ग़ज़ल संग्रह के सृजनकर्ता पंकज सुबीर की शायरी उर्दू की रवायती शायरी है, जो गजलों को उनके  पारंपरिक अंदाज़ में बयां करती हैं। नाजुक और दिल को छूने वाली ग़ज़ल कहने में सिद्धहस्त शायर पंकज सुबीर के चंद अशआर मैं यहां प्रस्तुत कर रही हूं जो मुझे भी बेहद पसंद हैं… और जो मेरे इस ब्लॉग ग़ज़लयात्रा के पाठकों को भी पसंद आयेंगे-
बड़ी जानी हुई आवाज़ में किसने बुलाया है
कोई गुज़रे हुए वक्तों से शायद लौट आया है
हमारा नाम ही आया नहीं पूरे फ़साने में
कहानी को कुछ इस अंदाज से उसने सुनाया है
सुबीर के ग़ज़ल संग्रह की शीर्षक ग़ज़ल के ये शेर देखें-
अभी समझाएँ क्या तुमको, अभी तुम इश्क़ में हो
अभी तो बस दुआएँ लो, अभी तुम इश्क़ में हो
तुम्हारे हाथ में जलती रहे सिगरेट मुसलसल
कलेजे को जरा फूँको अभी तुम इश्क़ में हो
पंकज सुबीर

….. और सुबीर की इश्क़ में उपजी समस्याओं के प्रति यह बयानगी देखिये -
लगा लो दिल अगर तो दिल लगाना भी समस्या है
किस्से बन गए कितने जरा सा मुस्कुराने पर
तुम्हारे शहर में तो मुस्कुराना भी समस्या है
सुना है जुगनुओं से हो गया नाराज़ है सूरज
किसी का बहुत ज्यादा जगमगाना भी समस्या है
यूँ सारी रात बरसोगे तो प्यासा मर ही जाएगा
किसी प्यासे पे ज़्यादा बरस जाना भी समस्या है

सुबीर की शायरी संवेदनशील रूमानियत के धरातल पर मजबूती से ठहरी हुई शायरी है, एक उदाहरण देखें-
किसी का जुल्फ़ से पानी झटकना
इसी का नाम बारिश है महोदय
ये नज़रें आज फिर कुर्की करेंगी
बताओ किस पे नालिश है महोदय
मुझे सूली चढ़ा कर ख़त्म कर दो
मेरे सीने में आतिश है महोदय

सुबीर की शायरी दिल को छू लेने वाली शायरी है -
दरख्तों से गिरते हुए ज़र्द पत्ते
हवाओं में यूँ ही बिखरते रहेंगे
ये मौसम है मौसम,कहाँ ये रूके हैं
गुज़रते रहे हैं,गुज़रते रहेंगे
 
‘अभी तुम इश्क़ में हो’ के विमोचन के अवसर पर पंकज सुबीर