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| Dr. Varsha Singh |
ये दुआ कीजिए
- डॉ. वर्षा सिंह
अब हमें चाहिए क़िस्मतें ये नहीं
मौसमों की बुरी रंगतें ये नहीं
कार्बन से भरी है हवा की शिरा
दे सकेगी कभी सेहतें ये नहीं
रह सके आस्था जिन दरों पर, वहां
हों नक़ाबों मढ़ी सूरतें ये नहीं
झेलना ही नियति बन गई है जिन्हें
ख़्वाब में भी गढ़ी मूरतें ये नहीं
धर्म का संकुचन जिनके हाथों हुआ
श्लोक भी ये नहीं, आयतें ये नहीं
ये दुआ कीजिए पीढ़ियां हो सुखी
छू सके भी उन्हें दहशतें ये नहीं
दौर संत्रास का ही रहेगा सदा
गर सुधारी गई हालतें ये नहीं
लोग जिनके लिए मर मिटे हैं यहां
साथ "वर्षा" गईं दौलतें ये नहीं
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