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| Dr. Varsha Singh |
शायरी मेरी सहेली की तरह
- डॉ. वर्षा सिंह
शायरी मेरी सहेली की तरह
मेंहदी वाली हथेली की तरह
हर्फ़ की परतों में खुलती जा रही
ज़िन्दगी जो थी पहेली की तरह
मेरे सिरहाने में तकिया ख़्वाब का
नींद आती है नवेली की तरह
आग की सतरें पिघल कर सांस में
फिर महकती हैं चमेली की तरह
ये मेरा दीवान "वर्षा"- धूप का
रोशनी की इक हवेली की तरह
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(मेरे ग़ज़ल संग्रह "सच तो ये है" से)
