शुक्रवार, जून 30, 2017

फूल खिले तो.....

फूल खिले तो पूरी दुनिया
जश्न मनाती लगती है
कोई अपना साथ चले तो
मंज़िल आती लगती है

यादों के उजियाले हैं

दिल में डेरा डाले हैं
यादों के उजियाले हैं

हम तुम जब भी साथ हुए
पल वो बड़े निराले हैं

छोटे - छोटे लम्हे भी
बेहद ख़ुशियों वाले हैं

ख़्वाब हमारे अपने हैं
मिल जुल हमने पाले हैं

ग़म से "वर्षा" डरना क्या
ग़म तो देखे- भाले हैं

सोमवार, मई 01, 2017

चुभ रही ख़ामोशियां, कुछ तो कहो

प्रिय मित्रो,
              मेरे ग़ज़ल संग्रह "वक़्त पढ़ रहा है"  से एक ग़ज़ल आप सब के लिए....
चुभ रही ख़ामोशियाँ कुछ तो कहो
उठ रही हैं, उंगलियां कुछ तो कहो
#वक़्त_पढ़_रहा_है

बुधवार, मार्च 08, 2017

Happy Women's Day

डॉ. वर्षा सिंह की ग़ज़ल -

सागर की लहर, झील का पानी हैं औरतें।
बहती  हुई  नदी  की   रवानी हैं औरतें।

दुनिया की हर मिसाल में शामिल हैं आज वे
‘लैला’ की, ‘हीर’ की जो कहानी  हैं औरतें।

उनका  लिखित स्वरूप  महाकाव्य की तरह
वेदों की ऋचाओं-सी  ज़ुबानी  हैं  औरतें।

मिलती हैं  जब कभी  वे  सहेली के रूप में
यादों  की  वादियों-सी  सुहानी  हैं औरतें।

‘मीरा’  बनी कभी,  तो ‘कमाली’  बनी कभी
‘वर्षा’  कहा  सभी  ने -‘दीवानी हैं औरतें’।
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