बुधवार, मार्च 08, 2017

Happy Women's Day

डॉ. वर्षा सिंह की ग़ज़ल -

सागर की लहर, झील का पानी हैं औरतें।
बहती  हुई  नदी  की   रवानी हैं औरतें।

दुनिया की हर मिसाल में शामिल हैं आज वे
‘लैला’ की, ‘हीर’ की जो कहानी  हैं औरतें।

उनका  लिखित स्वरूप  महाकाव्य की तरह
वेदों की ऋचाओं-सी  ज़ुबानी  हैं  औरतें।

मिलती हैं  जब कभी  वे  सहेली के रूप में
यादों  की  वादियों-सी  सुहानी  हैं औरतें।

‘मीरा’  बनी कभी,  तो ‘कमाली’  बनी कभी
‘वर्षा’  कहा  सभी  ने -‘दीवानी हैं औरतें’।
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शनिवार, जुलाई 23, 2016

Dr Varsha Singh honoured by Hero Central Motors, Sagar

Dr

My Poetry


फूल सा जीवन व्यर्थ न करना
ग़म से बेशक  कभी न  डरना
चाहे जितनी अड़चन आए
बीच  राह  में  कभी न रुकना
- डॉ वर्षा सिंह

My Shayari


भोर हो कर भी ज़िन्दगी ठहरी
गर  ख़ुमारी  न रात की  उतरी

ज़िद पे गर आ गये विफल होगी
लाख़ दुश्मन की चाल हो गहरी

आइये मिल के हम करें कोशिश
हो  न  'वर्षा' कहीं  कभी  ज़हरी
- डॉ वर्षा सिंह