बुधवार, मई 02, 2012

फोन पर कहना ....


11 टिप्‍पणियां:

  1. चित्र बहुत कुछ कह रहा हैं :)

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आज चार दिनों बाद नेट पर आना हुआ है। अतः केवल उपस्थिति ही दर्ज करा रहा हूँ!

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  3. कोई क्या कहे ...कोई क्या सुनना चाहता है ..?
    इस चहरे की शोखी ही बयाँ कर रही है ....!
    शुभकामनाएँ!

    एक अपील ...सिर्फ एक बार ?

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  4. अय्य्याऽऽऽऽ…

    देखा वर्षा जी
    इसे कहते हैं 'देखन में छोटे लगे घाव करे गंभीर ' …
    हमारे धीर गंभीर चाचू अशोक सलूजा जी मूड में आ जाएं , समझिए रचना धन्य है !
    :)

    हार्दिक शुभकामनाएं !
    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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