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रविवार, मार्च 08, 2020

08 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष : नारी को सम्मान दो - डॉ. वर्षा सिंह

Dr Varsha Singh

     अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज मेरी ताज़ा ग़ज़ल को web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 08 मार्च 2020 में स्थान मिला है।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏
मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...
http://yuvapravartak.com/?p=26132

नारी को सम्मान दो
        - डॉ. वर्षा सिंह

मां,भाभी है, बहन है नारी, सदा इसे सम्मान दो।
मानव जीवन पाया है तो मानवता को मान दो।

होली और दिवाली हमको सदा यही सिखलाते हैं
धर्म हमारा मानवता है, इसे नई पहचान दो

आपस में सद्भभाव बढ़ाना, मिलजुल कर हमको रहना
हर चेहरे को अपनेपन की, इक मीठी मुस्कान दो

भारत देश हमारा, इस पर गर्व सदा है, सदा रहेगा
आंच न आए कभी देश पर, इस पर अपनी जान दो

पर्यावरण बचाने का भी तो दायित्व हमारा है
पौधारोपण कर धरती को "वर्षा" जीवनदान दो
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#ग़ज़लवर्षा
#युवाप्रवर्तक


शनिवार, मार्च 07, 2020

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ग़ज़ल : औरतें - डॉ. वर्षा सिंह


     अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मेरी ताज़ा ग़ज़ल को web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 06 मार्च 2020 में स्थान मिला है।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏
मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...
http://yuvapravartak.com/?p=25898

 औरतें
                 - डॉ. वर्षा सिंह

सागर की लहर, झील का पानी हैं औरतें।
बहती  हुई नदी  की  रवानी   हैं   औरतें।

दुनिया की हर मिसाल में शामिल हैं आज ये
‘लैला’ की, ‘हीर’ की जो कहानी  हैं औरतें।

इनका लिखित स्वरूप महाकाव्य की तरह
वेदों  की  ऋचाओं-सी  ज़ुबानी हैं औरतें।

मिलती हैं  जब कभी ये सहेली के रूप में
यादों  की वादियों-सी  सुहानी  हैं  औरतें।

‘मीरा’ बनी कभी,  तो ‘कमाली’ बनी कभी
‘वर्षा’  कहा  सभी ने - ‘सयानी हैं औरतें’।
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#ग़ज़लवर्षा