औरतें लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
औरतें लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, मार्च 07, 2021

औरतें | 08 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष | ग़ज़ल | डॉ. वर्षा सिंह

ग़ज़ल
औरतें
-डॉ. वर्षा सिंह

सागर की लहर, झील का पानी हैं औरतें।

बहती  हुई  नदी  की   रवानी हैं औरतें।

दुनिया की हर मिसाल में शामिल हैं आज वो
‘लैला’ की, ‘हीर’ की जो कहानी  हैं औरतें।

उनका  लिखित स्वरूप  महाकाव्य की तरह
वेदों की ऋचाओं-सी  ज़ुबानी  हैं  औरतें।

मिलती हैं  जब कभी  वो  सहेली के रूप में
यादों  की  वादियों-सी  सुहानी  हैं औरतें।

‘मीरा’  बनी कभी,  तो ‘कमाली’  बनी कभी
‘वर्षा’  कहा  सभी  ने -‘सयानी हैं औरतें’।
      ---------------------

शनिवार, मार्च 07, 2020

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ग़ज़ल : औरतें - डॉ. वर्षा सिंह


     अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मेरी ताज़ा ग़ज़ल को web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 06 मार्च 2020 में स्थान मिला है।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏
मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...
http://yuvapravartak.com/?p=25898

 औरतें
                 - डॉ. वर्षा सिंह

सागर की लहर, झील का पानी हैं औरतें।
बहती  हुई नदी  की  रवानी   हैं   औरतें।

दुनिया की हर मिसाल में शामिल हैं आज ये
‘लैला’ की, ‘हीर’ की जो कहानी  हैं औरतें।

इनका लिखित स्वरूप महाकाव्य की तरह
वेदों  की  ऋचाओं-सी  ज़ुबानी हैं औरतें।

मिलती हैं  जब कभी ये सहेली के रूप में
यादों  की वादियों-सी  सुहानी  हैं  औरतें।

‘मीरा’ बनी कभी,  तो ‘कमाली’ बनी कभी
‘वर्षा’  कहा  सभी ने - ‘सयानी हैं औरतें’।
      ---------------------
#ग़ज़लवर्षा