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मंगलवार, मार्च 17, 2020

ग़ज़ल... जंग छिड़ी है कुर्सी की - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

     समसामयिक घटनाक्रमों ... वर्तमान हालातों पर आज मेरी ताज़ा ग़ज़ल को web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 17 मार्च 2020 में स्थान मिला है।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏
मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...
http://yuvapravartak.com/?p=26639

ग़ज़ल

जंग छिड़ी है कुर्सी की
            -डॉ. वर्षा सिंह

निष्ठा पर भी दाम लगे बाज़ारों में
चमक नहीं अब शेष चुनावी नारों में

जनता की आवाज़ सुनाई दे कैसे
शोर बहुत है सत्ता के गलियारों में
         
रंगमंच पर अभी यवनिका पतन कहां!
जोश बहुत है बेशक नाटककारों में

धराशायी करने की तिकड़म जारी है
जंग छिड़ी है कुर्सी की अब यारों में

स्वार्थसिद्ध करने को ही चमकीं अक्सर
बहुत धार है जंग लगी तलवारों में

शब्द लांछित हों गर कहने-सुनने से
कर लेना कुछ बातें ज़रा इशारों में

मझधारों में नाव उलटने की साज़िश
होड़ लगी है "वर्षा" यहां किनारों में
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#ग़ज़लवर्षा
#युवाप्रवर्तक