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Dr. Varsha Singh |
मेरी ग़ज़ल को web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 09.02.2019 में स्थान मिला है।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏
कृपया पत्रिका में मेरी ग़ज़ल पढ़ने हेतु निम्नलिखित Link पर जायें....
http://yuvapravartak.com/?p=9749
सुन लो, यही कहानी है।
जीवन बहता पानी है ।
जी लो आज अभी जो है
बेशक़ दुनिया फानी है।
नैट- चैट की बातों में
चिट्ठी हुई पुरानी है।
पहले लव की शेष यही
सूखा फूल निशानी है।
सबके मन को भाये जो,
मीठी बोली- बानी है।
गर वसन्त है राजा तो,
"वर्षा" ऋतु की रानी है।
- डॉ. वर्षा सिंह
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