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Dr. Varsha Singh |
उसे देखा नहीं कितने दिनों से
सुकूं पाया नहीं कितने दिनों से
न पलकों से लगीं पलकें ज़रा भी
दिखा सपना नहीं कितने दिनों से
शज़र तन्हा, परिन्दे दूर जाते
समा बदला नहीं कितने दिनों से
न पूछो दोस्तो अब हाल मेरा
पता अपना नहीं कितने दिनों से
नदी सूखी, हवा भी नम नहीं है
हुई "वर्षा" नहीं कितने दिनों से
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 01 मार्च 2019 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंबेहतरीन सखी
जवाब देंहटाएंसादर
वाह!!!
जवाब देंहटाएंलाजवाब...