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| Dr. Varsha Singh |
ग़ज़ल
अजब तमाशा देखा मैंने
- डॉ. वर्षा सिंह
मैंने अपनी बात कही थी, उसने अपनी समझी बात
तब से वह करता है मेरी, मैं करती हूं उसकी बात
अजब तमाशा देखा मैंने, दुनिया के इस मेले में
जिसके जी में जो आता है करता बहकी- बहकी बात
धोखे से भी मत कह देना, प्यार-मुहब्बत का किस्सा
वरना दूर तलक जाएगी मुंह से जो भी निकली बात
क़ैद ज़िन्दगी के कुछ लम्हे, एल्बम की तस्वीरों में
याद आएगी कभी किसी दिन, बेशक भूली-बिसरी बात
कभी किसी मौके पर "वर्षा" चुप रह जाना ग़लत नहीं
ख़ुशियों की गर कर न सको तो मत करना तुम ग़म की बात
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