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Dr. Varsha Singh |
लौ न गणतंत्र की बुझाने पाए
- डॉ. वर्षा सिंह
हमने दिल में ये आज ठानी है
एक दुनिया नई बसानी है
जिनके हाथों में क़ैद है क़िस्मत
हर ख़ुशी उनसे छीन लानी है
दिल के सोए हुए चरागों में
इक नई रोशनी जगानी है
दहशतों से भरा हुआ है चमन
एकता की कली खिलानी है
जंगजूओं की महफ़िलों में हमें
प्यार की इक ग़ज़ल सुनानी है
देश आज़ाद रहेगा अपना
इसमें गंगो-जमन का पानी है
लौ न गणतंत्र की बुझाने पाए
ये शहीदों की इक निशानी है
लाख ज़ुल्म-ओ-सितम किए जाएं
अम्न की आरती सजानी है
हिन्द की सरज़मीन जन्नत है
इस पे क़ुर्बान हर जवानी है
तआरुफ़ पूछिए न "वर्षा" का
मेघ और बूंद की इक कहानी है
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आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज मंगलवार 26 जनवरी 2021 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंहार्दिक आभार प्रिय दिव्या अग्रवाल जी 🙏
हटाएंबहुत बढ़िया।
जवाब देंहटाएंगणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
हार्दिक धन्यवाद माथुर जी
हटाएंआपको भी गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
बहुत सुन्दर और सामयिक ग़ज़ल।
जवाब देंहटाएं72वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
बहुत-बहुत आभार आदरणीय शास्त्री जी 🙏
हटाएंआपके द्वारा मिली सराहना मेरे लिए हमेशा अत्यंत महत्वपूर्ण रहती है।
आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 27 जनवरी 2021 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंप्रिय पम्मी जी,
हटाएंहार्दिक आभार ... मेरी ग़ज़ल को "पांच लिंकों का आनन्द" हेतु चयनित करने के लिए।
शुभकामनाओं सहित,
डॉ. वर्षा सिंह
बहुत सुन्दर सृजन। गणतंत्र दिवस की असंख्य शुभकामनाएं।
जवाब देंहटाएंहार्दिक आभार आदरणीय शांतनु सान्याल जी 🙏
हटाएंवाह!वर्षा जी ,बेहतरीन सृजन ।
जवाब देंहटाएंबहुत धन्यवाद प्रिय शुभा जी 🙏
हटाएंसुंदर सृजन । सदा की भांति । गणतंत्र की शुभकामनाओं सहित अभिनंदन वर्षा जी ।
जवाब देंहटाएंबहुत-बहुत धन्यवाद आपको आदरणीय जितेन्द्र माथुर जी 🙏
हटाएंनमन वर्षा जी 🙏😔🙏😔🙏🙏🙏
जवाब देंहटाएंलाजवाब
जवाब देंहटाएं🙏🙏🙏🙏