रविवार, जनवरी 03, 2021

फ़ासले हैं कई | ग़ज़ल | डॉ. वर्षा सिंह | संग्रह - सच तो ये है


Dr. Varsha Singh

फ़ासले हैं कई 

     -डॉ. वर्षा सिंह


एक रिश्ते के मायने हैं कई 

पास रहकर भी फ़ासले हैं कई 


घाटियों में नदी का खो जाना 

इस तरह के तो हादसे हैं कई 


उसने देखा जिसे भला जो लगा 

एक सूरत है, आईने हैं कई 


रास्ता एक कोई होगा कहीं 

अपने-अपने तो दायरे हैं कई 


एक "वर्षा" है, बदलियां ढेरों 

प्यार है एक, वायदे हैं कई


-----------------


(मेरे ग़ज़ल संग्रह "सच तो ये है" से)

18 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. हार्दिक आभार आदरणीय शास्त्री जी 🙏🏻

      हटाएं
  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज रविवार 03 जनवरी 2021 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार आदरणीय दिग्विजय अग्रवाल जी 🙏🏻

      हटाएं
  3. उत्तर
    1. हार्दिक धन्यवाद आदरणीय सान्याल जी 🙏🏻

      हटाएं
  4. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार(०४-०१-२०२१) को 'उम्मीद कायम है'(चर्चा अंक-३९३६ ) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    --
    अनीता सैनी

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार प्रिय अनीता सैनी जी 🙏🏻💐🙏

      हटाएं
  5. बेहतरीन व लाज़वाब ग़ज़ल । सुन्दर सृजन हेतु बहुत बहुत बधाई वर्षा जी !

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपको प्रिय मीना जी 🙏💐🙏

      हटाएं
  6. बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हार्दिक धन्यवाद आदरणीय अनीता जी 🙏

      हटाएं